मैं भारत की बेटी
मैं भारत की बेटी, आज ये बताने आई हूँ,
हम भूल चुके हैं जिस भारत को, उसे याद दिलाने आई हूँ।
हाँ, गर्व है कि हम अब आगे बढ़ चुके हैं,
पर मत भूलो उस सूली को, जिस पर कई वीर चढ़ चुके हैं।
आज की परिस्थितियों को देख तुम कहते हो — हमने बहुत कष्ट सहे,
ज़रा याद करो उन वीरों को, जिन्होंने जवानी से खेला,
अपना सब कुछ देश को देकर, हँसते-हँसते बलिदान झेला।
सिहर उठती हूँ सोचकर, वो जलियांवाला बाग,
जहाँ लाशों का मेला था — हर शव बलिदान में लिपटा,
वहाँ कोई अकेला न था, सबने मातृभूमि का कर्ज चुकाया था।
सोचो—सोचो, वे एकजुट न होते तो क्या आज हम यहाँ होते?
भेदभाव की आग में जलकर, न जाने कहाँ खो गए होते!
हाँ, हमें भी एकजुट रहना होगा,
क्योंकि भगत सिंह ने भी संगठित होकर भारत के गान गाए थे,
वो गान नहीं, सबके दिलों के अरमान गाए थे।
आज हम अलग-अलग रहते हैं, विवाद करते हैं हम,
पर एकजुट होकर देखो — हम राष्ट्रवाद को जगा सकते हैं हम।
याद है न — गांधी जी थे, जिन्होंने त्याग की मिसाल बनाई,
एक पिता की तरह पूरे देश को प्रेम से अपनाया।
तिरंगे को सम्मान दिया, आँखों पर सजाया,
और राजगुरु ने भी हँसते-हँसते अपना शीश चढ़ाया।
लेकिन… लेकिन… लेकिन…
तुम भूल रहे हो शायद उन्हें,
जिन्होंने इतिहास की परिभाषा बदल दी —
झाँसी वाली रानी, जिसने पुरुषों को भी पीछे छोड़ दिया,
सिंहनी की तरह रण में गर्जी,
देश के लिए प्राणों की आहुति दे दी।
हाँ, मैंने नहीं देखा उन वीरों को, पर उनका हौसला देखा है,
काला पानी की सज़ा झेलते, वो अडिग फैसला देखा है।
देखो-देखो उस भारत को,
जिससे बार-बार लूटी गई खुशहाली है,
तरसती है वो भारत मां भी,
जिसे अपने ही कई बार भूले हैं।
हाँ… मैं भारत की बेटी, आज यही बताने आई हूँ,
हम भूल चुके हैं जिस भारत को —
उसे फिर से याद दिलाने आई हूँ।
✍️ रौशनी कुमारी

Nice Post