मां की यादें -By Roshni Kumari

Vinay Kumar
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मां की यादें





आखें खोल कुछ तो बोल,  
क्यों तू है मौन?  
तू ना रहेगी तो लोरिया सुनाएगा कौन?  

सारा संसार नाम लेकर बुलाता है,  
कौन बुलाता है कहकर बेटी?  
तू ही तो बस बुलाती थी बेटी,  
फिर क्यों माँ आज तू यूँ है लेटी?  

उठ जा अब, न देख पाऊँगी माँ तेरी बेहोशी,  
काँटों से भी ज्यादा चुभती है माँ तेरी खामोशी।  

तेरे जाने से कामयाबी के सारे द्वार लुप्त हो गए,  
जो तुझसे कहा करती थी वो भाव गुप्त हो गए।  

बचपन से आज तक तूने मेरा जीवन निखारा है,  
फिर आज क्यों तेरी चुप्पी ने मेरा संसार उजाड़ा है?  

कहते हैं हर बच्चे का जीवन भगवान पर निर्भर होता है,  
मैंने तो ये भी सुना है,  
माँ का जीवन उसकी संतान पर निर्भर होता है।  

क्या तेरे दिल को मेरी किसी गुनाहों ने छंद कर दिए?  
लेकिन तेरी नाराजगी ने मेरे सारे राहों को बंद कर दिए।  

जितना तू मुझे प्यार देती थी,  
उतना ना कोई दे पाएगा।  
अपनी संतान को, और मेरे जीवन में,  
माँ कोई न ले पाएगा तेरे स्थान को।  

मेरे जीवन की शुरुआत तू ही थी,  
मेरे जीवन की गुरुमात तू ही थी।  
तेरे शिक्षा में चाव था मेरा,  
तेरे प्रति शुद्ध भाव था मेरा।  

कई बार मेरी शरारतों को नोंक-झोंक में बदल दिया,  
फिर आज क्यों छोड़ गई,  
और उत्सव को शोक में बदल दिया?  

मैं अब दिन-रात तुझको याद करती हूँ,  
मन बहलाने के लिए खुद से संवाद करती हूँ।  
आपके जाने के बाद पता नहीं क्यों,  
मैं खुद से विवाद करती हूँ।  

सब अच्छा था, लेकिन पलट गया खेल,  
तेरे बिना जीवन जैसे हम आ गए हो जेल।  

क्या तू खुश हैं?  
क्योंकि तेरी आत्मा का परमात्मा से हो गया मेल?  

पहले तो तेरी ममता ने मुझे घेर लिया था,  
सोचा अब ना रह पाऊँगी,  
क्योंकि मैंने संसार से मुँह फेर लिया था।  

लेकिन मैं वादा करती हूँ माँ,  
मैं हमेशा ख्याल रखूँगी,  
अपने इस जन्मभूमि के मिट्टी का।  

और हर पल इंतज़ार करूँगी,  
तेरे उस प्यार भरी चिट्ठी का,  
उस प्यार भरी चिट्ठी का॥  

~By Roshni Kumari 

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Nice Post

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